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mahabharat 1.174.30: नन्दिनी बोली - हे प्रभु! क्या आपने मुझे त्याग दिया है, जो आप ऐसी बात कह रहे हैं? हे ब्रह्मन्! यदि आपने मुझे त्याग नहीं दिया है, तो मुझे कोई बलपूर्वक नहीं ले जा सकता। 30।   |   mahabharat अध्याय 1.174: वसिष्ठजीके अद्‍भुत क्षमा-बलके आगे विश्वामित्रजीका पराभव   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 174: वसिष्ठजीके अद्‍भुत क्षमा-बलके आगे विश्वामित्रजीका पराभव  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.174.30 
नन्दिन्युवाच
किं नु त्यक्तास्मि भगवन् यदेवं त्वं प्रभाषसे।
अत्यक्ताहं त्वया ब्रह्मन् नेतुं शक्या न वै बलात्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
नन्दिनी बोली - हे प्रभु! क्या आपने मुझे त्याग दिया है, जो आप ऐसी बात कह रहे हैं? हे ब्रह्मन्! यदि आपने मुझे त्याग नहीं दिया है, तो मुझे कोई बलपूर्वक नहीं ले जा सकता। 30।
 
Nandini said - O Lord! Have you forsaken me, that you are saying such a thing? O Brahman! If you have not forsaken me, then no one can take me away by force. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)