श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 174: वसिष्ठजीके अद्‍भुत क्षमा-बलके आगे विश्वामित्रजीका पराभव  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.174.27 
गौरुवाच
कशाग्रदण्डाभिहतां क्रोशन्तीं मामनाथवत्।
विश्वामित्रबलैर्घोरैर्भगवन् किमुपेक्षसे॥ २७॥
 
 
अनुवाद
गाय बोली - हे प्रभु! विश्वामित्र के क्रूर सैनिक मुझे कोड़ों और लाठियों से पीट रहे हैं। मैं अनाथ की भाँति रो रही हूँ। आप मेरी उपेक्षा क्यों कर रहे हैं?॥27॥
 
The cow said - O Lord! Vishwamitra's ruthless soldiers are beating me with whips and sticks. I am crying like an orphan. Why are you ignoring me?॥27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)