Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.174.24-25: वशिष्ठ बोले, "हे प्रिये! तुम बार-बार रो रही हो। मैं तुम्हारा विलाप सुन रहा हूँ, किन्तु मैं क्या कर सकता हूँ? हे शुभ नंदिनी! विश्वामित्र तुम्हें बलपूर्वक ले जा रहे हैं। इसमें मैं क्या कर सकता हूँ? मैं क्षमाशील ब्राह्मण हूँ।" | mahabharat अध्याय 1.174: वसिष्ठजीके अद्भुत क्षमा-बलके आगे विश्वामित्रजीका पराभव । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वशिष्ठ बोले, "हे प्रिये! तुम बार-बार रो रही हो। मैं तुम्हारा विलाप सुन रहा हूँ, किन्तु मैं क्या कर सकता हूँ? हे शुभ नंदिनी! विश्वामित्र तुम्हें बलपूर्वक ले जा रहे हैं। इसमें मैं क्या कर सकता हूँ? मैं क्षमाशील ब्राह्मण हूँ।"
Vasishtha said, "O dear! You are crying again and again. I hear your wailings, but what can I do? O auspicious Nandini! Vishwamitra is taking you away by force. What can I do in this? I am a forgiving Brahmin.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥