श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 174: वसिष्ठजीके अद्‍भुत क्षमा-बलके आगे विश्वामित्रजीका पराभव  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  1.174.21-22 
गन्धर्व उवाच
एवमुक्तस्तथा पार्थ विश्वामित्रो बलादिव॥ २१॥
हंसचन्द्रप्रतीकाशां नन्दिनीं तां जहार गाम्।
कशादण्डप्रणुदितां काल्यमानामितस्तत:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
गंधर्व कहते हैं - अर्जुन! वसिष्ठजी की बात सुनकर विश्वामित्रजी ने मानो बलपूर्वक उस नंदिनी गौ का हरण कर लिया, जिसका रंग हंस और चंद्रमा के समान श्वेत था। वे उसे कोड़ों और डंडों से पीटकर इधर-उधर हांक रहे थे।
 
Gandharva says - Arjun! On hearing Vasishtha's words, Vishwamitra as if by force kidnapped that Nandini cow whose colour was as white as the swan and the moon. She was being driven here and there after being beaten with whips and sticks. 21-22.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)