श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 174: वसिष्ठजीके अद्‍भुत क्षमा-बलके आगे विश्वामित्रजीका पराभव  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.174.2 
गन्धर्व उवाच
इदं वासिष्ठमाख्यानं पुराणं परिचक्षते।
पार्थ सर्वेषु लोकेषु यथावत् तन्निबोध मे॥ २॥
 
 
अनुवाद
गन्धर्व बोले - पार्थ! वशिष्ठजी का यह उपाख्यान समस्त लोकों में अत्यन्त प्राचीन कहा गया है। मैं उसे सत्य कहता हूँ, सुनो॥2॥
 
Gandharva said – Partha! This anecdote of Vashishthaji is said to be very old in all the worlds. I tell him the truth, listen. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)