श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 174: वसिष्ठजीके अद्‍भुत क्षमा-बलके आगे विश्वामित्रजीका पराभव  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.174.18 
विश्वामित्र उवाच
क्षत्रियोऽहं भवान् विप्रस्तपस्स्वाध्यायसाधन:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
विश्वामित्र बोले, 'मैं क्षत्रिय राजा हूँ और आप तप और स्वाध्याय करने वाले ब्राह्मण हैं।'18.
 
Visvamitra said, 'I am a Kshatriya king and you are a Brahmin who practices austerity and self-study.' 18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)