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mahabharat 1.173.11: कुरुनन्दन! इन महामुनि वशिष्ठ को पुरोहित रूप में पाकर उन नरपतियों ने भी बहुत से यज्ञ किये॥11॥   |   mahabharat अध्याय 1.173: गन्धर्वका वसिष्ठजीकी महत्ता बताते हुए किसी श्रेष्ठ ब्राह्मणको पुरोहित बनानेके लिये आग्रह करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 173: गन्धर्वका वसिष्ठजीकी महत्ता बताते हुए किसी श्रेष्ठ ब्राह्मणको पुरोहित बनानेके लिये आग्रह करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.173.11 
पुरोहितमिमं प्राप्य वसिष्ठमृषिसत्तमम्।
ईजिरे क्रतुभिश्चैव नृपास्ते कुरुनन्दन॥ ११॥
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! इन महामुनि वशिष्ठ को पुरोहित रूप में पाकर उन नरपतियों ने भी बहुत से यज्ञ किये॥11॥
 
Kurunandan! Having found this great sage Vashishtha in the form of a priest, those Narpatis also performed many yagyas. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)