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mahabharat 1.172.d5-d6: भरतश्रेष्ठ, उसी कुरु से उत्पन्न होने के कारण आप सभी 'कौरव' और 'कुरुवंशी' कहलाते हैं। इसी प्रकार, पुरु से उत्पन्न होने के कारण आप 'पौरव', अजमीढ़ कुल में उत्पन्न होने के कारण आप 'अजामीढ़' और भरत कुल में उत्पन्न होने के कारण आप 'भरत' कहलाते हैं। इस प्रकार मैंने आपके वंशज तपती की सम्पूर्ण प्राचीन कथा कह सुनाई। अब आप लोग पुरोहित को आगे रखकर इस पृथ्वी का पालन और उपभोग करें।   |   mahabharat अध्याय 1.172: वसिष्ठजीकी सहायतासे राजा संवरणको तपतीकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 172: वसिष्ठजीकी सहायतासे राजा संवरणको तपतीकी प्राप्ति  »  श्लोक d5-d6
 
 
श्लोक  1.172.d5-d6 
(कुरूद्भवा यतो यूयं कौरवा: कुरवस्तथा।
पौरवा आजमीढाश्च भारता भरतर्षभ॥
तापत्यमखिलं प्रोक्तं वृत्तान्तं तव पूर्वकम्।
पुरोहितमुखा यूयं भुङ्‍‍ग्ध्वं वै पृथिवीमिमाम्॥ )
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ, उसी कुरु से उत्पन्न होने के कारण आप सभी 'कौरव' और 'कुरुवंशी' कहलाते हैं। इसी प्रकार, पुरु से उत्पन्न होने के कारण आप 'पौरव', अजमीढ़ कुल में उत्पन्न होने के कारण आप 'अजामीढ़' और भरत कुल में उत्पन्न होने के कारण आप 'भरत' कहलाते हैं। इस प्रकार मैंने आपके वंशज तपती की सम्पूर्ण प्राचीन कथा कह सुनाई। अब आप लोग पुरोहित को आगे रखकर इस पृथ्वी का पालन और उपभोग करें।
 
Bharat Shreshtha, because you were born from the same Kuru, all of you are called 'Kaurava' and 'Kuruvanshi'. Similarly, because you were born from Puru, you are called 'Paurav', because you were born in Ajamidh clan, you are called 'Ajamidh' and because you were born in Bharat clan, you are called 'Bharat'. In this way, I have told the entire ancient story of your descendant Tapati. Now you people should keep the priest in front and take care of and enjoy this earth.
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि चैत्ररथपर्वणि तपत्युपाख्यानसमाप्तौ द्विसप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत चैत्ररथपर्वमें तपती-उपाख्यानकी समाप्तिसे सम्बन्ध रखनेवाला एक सौ बहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)