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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 172: वसिष्ठजीकी सहायतासे राजा संवरणको तपतीकी प्राप्ति  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  1.172.50 
तस्यां संजनयामास कुरुं संवरणो नृप:।
तपत्यां तपतां श्रेष्ठ तापत्यस्त्वं ततोऽर्जुन॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
हे तपस्वियों में श्रेष्ठ अर्जुन! महाराज संवरण ने तपती के गर्भ से कुरु को उत्पन्न किया था, अतः उसी वंश में उत्पन्न होने के कारण तुम सब तपत्य हो गए।
 
O Arjuna, the best among ascetics! Maharaja Samvarana had produced Kuru from the womb of Tapati; therefore, by being born in the same lineage, you all became Tapatyas. 50.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)