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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 172: वसिष्ठजीकी सहायतासे राजा संवरणको तपतीकी प्राप्ति  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  1.172.5-6 
तं समुत्थापयामास नृपतिं काममोहितम्।
भूतलाद् भूमिपालेशं पितेव पतितं सुतम्॥ ५॥
प्रज्ञया वयसा चैव वृद्ध: कीर्त्या नयेन च।
अमात्यस्तं समुत्थाप्य बभूव विगतज्वर:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
राजमंत्री न केवल आयु में बहुत वृद्ध थे, अपितु उनमें महान् बुद्धि, यश और नीति भी थी। जैसे एक पिता अपने गिरे हुए पुत्र को भूमि से उठा लेता है, उसी प्रकार उन्होंने कामपीड़ा से मूर्छित भूमिपालों के स्वामी महाराज संवरण को शीघ्रता से उठा लिया। राजा को उठाकर जीवित पाकर उनकी चिंता दूर हो गई।
 
The royal minister was not only very old in age, but also had great wisdom, fame and morality. Just like a father picks up his fallen son from the ground, in the same way he quickly picked up Maharaj Samvaran, the lord of the Bhumipals, who had fainted due to sexual anguish. After picking up the king and finding him alive, his worries were dispelled. 5-6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)