Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.172.40: ऐसे भयंकर समय में ओस की एक बूँद भी धरती पर नहीं गिरी। परिणाम यह हुआ कि फसलें बिल्कुल नहीं उगीं।   |   mahabharat अध्याय 1.172: वसिष्ठजीकी सहायतासे राजा संवरणको तपतीकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 172: वसिष्ठजीकी सहायतासे राजा संवरणको तपतीकी प्राप्ति  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  1.172.40 
तस्मिंस्तथाविधे काले वर्तमाने सुदारुणे।
नावश्याय: पपातोर्व्यां तत: सस्यानि नारुहन्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
ऐसे भयंकर समय में ओस की एक बूँद भी धरती पर नहीं गिरी। परिणाम यह हुआ कि फसलें बिल्कुल नहीं उगीं।
 
In such a terrible time not even a drop of dew fell on the earth. The result was that crops did not grow at all. 40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)