Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.172.3-4: वे समय पर गिरे हुए ऊँचे इन्द्रध्वज के समान भूमि पर पड़े थे। उन महाधनुर्धर महाराज को ताप से मुक्त होकर इस प्रकार भूमि पर लेटे देखकर राजमंत्री इतना व्याकुल हो गया मानो उसके शरीर में आग लग गई हो। वह तुरन्त उनके पास गया। स्नेह के कारण उसके हृदय में घबराहट उत्पन्न हो गई थी ॥3-4॥ | mahabharat अध्याय 1.172: वसिष्ठजीकी सहायतासे राजा संवरणको तपतीकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे समय पर गिरे हुए ऊँचे इन्द्रध्वज के समान भूमि पर पड़े थे। उन महाधनुर्धर महाराज को ताप से मुक्त होकर इस प्रकार भूमि पर लेटे देखकर राजमंत्री इतना व्याकुल हो गया मानो उसके शरीर में आग लग गई हो। वह तुरन्त उनके पास गया। स्नेह के कारण उसके हृदय में घबराहट उत्पन्न हो गई थी ॥3-4॥
He lay on the ground like a tall Indra flag that had fallen at the right time. Seeing that great archer Maharaja, freed from the heat, lying on the ground like this, the royal minister became so agitated as if his body had caught fire. He immediately went to him. Panic had arisen in his heart due to affection. ॥3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥