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mahabharat 1.172.13: उस समय शत्रुओं का नाश करने वाले राजा संवरण ने मन ही मन अपने पुरोहित वसिष्ठ ऋषि का स्मरण किया।   |   mahabharat अध्याय 1.172: वसिष्ठजीकी सहायतासे राजा संवरणको तपतीकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 172: वसिष्ठजीकी सहायतासे राजा संवरणको तपतीकी प्राप्ति  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.172.13 
जगाम मनसा चैव वसिष्ठमृषिसत्तमम्।
पुरोहितममित्रघ्नस्तदा संवरणो नृप:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उस समय शत्रुओं का नाश करने वाले राजा संवरण ने मन ही मन अपने पुरोहित वसिष्ठ ऋषि का स्मरण किया।
 
At that time, King Samvarana, the destroyer of enemies, silently remembered his priest, the sage Vasishtha. 13.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)