Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.171.22-23: हे राजनश्रेष्ठ! मैं अपने शरीर की स्वामी नहीं हूँ, इसलिए आपके पास नहीं आ सकती; क्योंकि स्त्रियाँ कभी स्वतंत्र नहीं होतीं। आपका कुल समस्त लोकों में प्रसिद्ध है। कौन कन्या आप जैसे भक्तवत्सल राजा को अपना पति न बनाना चाहेगी?॥22-23॥ | mahabharat अध्याय 1.171: तपती और संवरणकी बातचीत । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न चाहमीशा देहस्य तस्मान्नृपतिसत्तम।
समीपं नोपगच्छामि न स्वतन्त्रा हि योषित:॥ २२॥
का हि सर्वेषु लोकेषु विश्रुताभिजनं नृपम्।
कन्या नाभिलषेन्नाथं भर्तारं भक्तवत्सलम्॥ २३॥
अनुवाद
हे राजनश्रेष्ठ! मैं अपने शरीर की स्वामी नहीं हूँ, इसलिए आपके पास नहीं आ सकती; क्योंकि स्त्रियाँ कभी स्वतंत्र नहीं होतीं। आपका कुल समस्त लोकों में प्रसिद्ध है। कौन कन्या आप जैसे भक्तवत्सल राजा को अपना पति न बनाना चाहेगी?॥22-23॥
O best of kings! I am not the owner of my body, therefore I cannot come near you; because women are never independent. Your clan is renowned in all the worlds. Which girl would not wish to make a devotee-loving king like you her husband?॥22-23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥