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mahabharat 1.170.9-10: उसके शरीर का एक-एक अंग अत्यंत सुंदर, सुडौल और दोषरहित था। उसकी आँखें बड़ी-बड़ी और काली थीं। वह सुंदरी उत्तम आचरण, साधु स्वभाव और सुंदर वेश-भूषा से सुशोभित थी। भारत! भगवान सूर्य को तीनों लोकों में ऐसा कोई पुरुष नहीं मिला जो रूप, चरित्र, गुण और शास्त्र-ज्ञान की दृष्टि से उसका पति बनने के योग्य हो। 9-10।   |   mahabharat अध्याय 1.170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  1.170.9-10 
सुविभक्तानवद्याङ्गी स्वसितायतलोचना।
स्वाचारा चैव साध्वी च सुवेषा चैव भामिनी॥ ९॥
न तस्या: सदृशं कंचित् त्रिषु लोकेषु भारत।
भर्तारं सविता मेने रूपशीलगुणश्रुतै:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उसके शरीर का एक-एक अंग अत्यंत सुंदर, सुडौल और दोषरहित था। उसकी आँखें बड़ी-बड़ी और काली थीं। वह सुंदरी उत्तम आचरण, साधु स्वभाव और सुंदर वेश-भूषा से सुशोभित थी। भारत! भगवान सूर्य को तीनों लोकों में ऐसा कोई पुरुष नहीं मिला जो रूप, चरित्र, गुण और शास्त्र-ज्ञान की दृष्टि से उसका पति बनने के योग्य हो। 9-10।
 
Each and every part of her body was very beautiful, well-formed and flawless. Her eyes were large and black. That beautiful lady was adorned with good conduct, saintly nature and beautiful attire. Bhaarat! Lord Surya did not find any man in the three worlds who was suitable to be her husband in terms of beauty, character, qualities and knowledge of scriptures. 9-10.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)