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mahabharat 1.170.44: जब वह कहीं दिखाई नहीं दिया तो महाराज अचेत हो गये और दो घंटे तक वहीं पड़े रहे तथा अत्यन्त विलाप करते रहे।   |   mahabharat अध्याय 1.170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  1.170.44 
अपश्यमान: स तु तां बहु तत्र विलप्य च।
निश्चेष्ट: पार्थिवश्रेष्ठो मुहूर्तं स व्यतिष्ठत॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
जब वह कहीं दिखाई नहीं दिया तो महाराज अचेत हो गये और दो घंटे तक वहीं पड़े रहे तथा अत्यन्त विलाप करते रहे।
 
When he could not see him anywhere, the great king became unconscious and lay there motionless for two hours while lamenting profusely.
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि चैत्ररथपर्वणि तपत्युपाख्याने सप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत चैत्ररथपर्वमें तपती-उपाख्यानविषयक एक सौ सत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)