श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  1.170.43 
तामन्वेष्टुं स नृपति: परिचक्राम सर्वत:।
वनं वनजपत्राक्षीं भ्रमन्नुन्मत्तवत् तदा॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
तब राजा उस कमलदल के समान विशाल नेत्रों वाली (दिव्य) कन्या की खोज में वन में सब ओर उन्मत्त होकर घूमने लगा ॥ 43॥
 
Then the king began to wander madly in all directions in the forest in search of that (divine) girl having eyes as large as lotus petals. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)