Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.170.39: हे यौवन के नशे से सुशोभित सुन्दरी! मैंने जितनी भी सुन्दर स्त्रियों को देखा या सुना है, उनमें से मैं किसी को भी तुम्हारे समान नहीं मानता। | mahabharat अध्याय 1.170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
या हि दृष्टा मया काश्चिच्छ्रुता वापि वराङ्गना:।
न तासां सदृशीं मन्ये त्वामहं मत्तकाशिनि॥ ३९॥
अनुवाद
हे यौवन के नशे से सुशोभित सुन्दरी! मैंने जितनी भी सुन्दर स्त्रियों को देखा या सुना है, उनमें से मैं किसी को भी तुम्हारे समान नहीं मानता।
'O beautiful lady adorned with the intoxication of youth! Of all the beautiful women I have seen or heard of, I do not consider any of them to be equal to you. 39.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥