Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.170.36: 'रामभोरु! तुम कौन हो? किसकी पुत्री हो? और यहाँ क्यों खड़ी हो? हे निर्मल मुस्कान वाली कन्या! तुम इस निर्जन वन में अकेली कैसे विचरण कर रही हो?॥ 36॥ | mahabharat अध्याय 1.170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कासि कस्यासि रम्भोरु किमर्थं चेह तिष्ठसि।
कथं च निर्जनेऽरण्ये चरस्येका शुचिस्मिते॥ ३६॥
अनुवाद
'रामभोरु! तुम कौन हो? किसकी पुत्री हो? और यहाँ क्यों खड़ी हो? हे निर्मल मुस्कान वाली कन्या! तुम इस निर्जन वन में अकेली कैसे विचरण कर रही हो?॥ 36॥
'Rambhoru! Who are you? Whose daughter are you? And why are you standing here? O girl with a pure smile! How are you wandering alone in this deserted forest?॥ 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥