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mahabharat 1.170.30: भूपाल संवरण ने जन्म से लेकर उस दिन तक जो कुछ देखा था, उसमें उस (दिव्य कन्या) के समान कोई रूप नहीं पाया॥30॥   |   mahabharat अध्याय 1.170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.170.30 
जन्मप्रभृति यत् किंचिद् दृष्टवान् स महीपति:।
रूपं न सदृशं तस्यास्तर्कयामास किंचन॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
भूपाल संवरण ने जन्म से लेकर उस दिन तक जो कुछ देखा था, उसमें उस (दिव्य कन्या) के समान कोई रूप नहीं पाया॥30॥
 
Whatever Bhupal Samvarana had seen from his birth till that day, he did not find any form similar to that (divine girl).॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)