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mahabharat 1.170.26: वह अपने शरीर और तेज के कारण अग्नि की ज्वाला के समान जान पड़ती थी। उसकी प्रसन्नता और मनोहर आभा से ऐसा प्रतीत होता था मानो वह शुद्ध चन्द्रमा की ज्योति हो। 26॥   |   mahabharat अध्याय 1.170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.170.26 
वपुषा वर्चसा चैव शिखामिव विभावसो:।
प्रसन्नत्वेन कान्त्या च चन्द्ररेखामिवामलाम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
वह अपने शरीर और तेज के कारण अग्नि की ज्वाला के समान जान पड़ती थी। उसकी प्रसन्नता और मनोहर आभा से ऐसा प्रतीत होता था मानो वह शुद्ध चन्द्रमा की ज्योति हो। 26॥
 
Due to her body and brightness, she looked like a flame of fire. Her happiness and pleasant glow made it appear as if she was a pure moonlight. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)