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mahabharat 1.170.25: पहले तो राजा ने उसकी सुन्दरता देखकर सोचा कि शायद वह स्वयं देवी लक्ष्मी हैं; फिर उसके मन में विचार आया कि सम्भव है कि सूर्य का तेज, सौरमण्डल से गिरकर, आकाश से इस कन्या के रूप में पृथ्वी पर आ गया हो।   |   mahabharat अध्याय 1.170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.170.25 
स हि तां तर्कयामास रूपतो नृपति: श्रियम्।
पुन: संतर्कयामास रवेर्भ्रष्टामिव प्रभाम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
पहले तो राजा ने उसकी सुन्दरता देखकर सोचा कि शायद वह स्वयं देवी लक्ष्मी हैं; फिर उसके मन में विचार आया कि सम्भव है कि सूर्य का तेज, सौरमण्डल से गिरकर, आकाश से इस कन्या के रूप में पृथ्वी पर आ गया हो।
 
At first the king, on seeing her beauty, thought that she might be Goddess Lakshmi herself; then it occurred to him that it is possible that the radiance of the Sun, having fallen from the solar system, has come to the earth from the sky in the form of this girl.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)