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mahabharat 1.170.24: शत्रु सेना का संहार करने वाले महाबली राजा संवरण अकेले थे और वह कन्या भी अकेली थी। उसके पास पहुँचकर राजा वहीं खड़े होकर स्थिर नेत्रों से उसे देखते रहे॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 1.170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.170.24 
स एक एकामासाद्य कन्यां परबलार्दन:।
तस्थौ नृपतिशार्दूल: पश्यन्नविचलेक्षण:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
शत्रु सेना का संहार करने वाले महाबली राजा संवरण अकेले थे और वह कन्या भी अकेली थी। उसके पास पहुँचकर राजा वहीं खड़े होकर स्थिर नेत्रों से उसे देखते रहे॥ 24॥
 
The great king Samvarana, who had destroyed the enemy army, was alone and the girl was also alone. On reaching her, the king stood there staring at her with fixed eyes.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)