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mahabharat 1.170.22-23: हे कुन्तीपुत्र! शिकार खेलते समय राजा का अद्वितीय घोड़ा भूख-प्यास से व्याकुल होकर पर्वत पर मर गया। पार्थ! घोड़े की मृत्यु के पश्चात राजा संवरण पर्वत शिखर पर पैदल ही विचरण करने लगे। घूमते-घूमते उन्हें बड़ी-बड़ी आँखों वाली एक कन्या दिखाई दी, जिसकी कोई भी स्त्री समता नहीं थी।   |   mahabharat अध्याय 1.170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना  »  श्लोक 22-23
 
 
श्लोक  1.170.22-23 
चरतो मृगयां तस्य क्षुत्पिपासासमन्वित:।
ममार राज्ञ: कौन्तेय गिरावप्रतिमो हय:॥ २२॥
स मृताश्वश्चरन् पार्थ पद्‍भ्यामेव गिरौ नृप:।
ददर्शासदृशीं लोके कन्यामायतलोचनाम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! शिकार खेलते समय राजा का अद्वितीय घोड़ा भूख-प्यास से व्याकुल होकर पर्वत पर मर गया। पार्थ! घोड़े की मृत्यु के पश्चात राजा संवरण पर्वत शिखर पर पैदल ही विचरण करने लगे। घूमते-घूमते उन्हें बड़ी-बड़ी आँखों वाली एक कन्या दिखाई दी, जिसकी कोई भी स्त्री समता नहीं थी।
 
O son of Kunti, while hunting, the king's unique horse died on the mountain due to hunger and thirst. Partha, after the death of the horse, king Samvarana started roaming on foot on the mountain peak. While roaming around, he saw a girl with big eyes, who had no equal in any woman.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)