Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.170.18: पार्थ! जिस प्रकार ब्रह्मवादी महर्षि उगते हुए सूर्य की पूजा करते हैं, उसी प्रकार क्षत्रिय, वैश्य तथा अन्य जातियाँ महाराजा संवरण की पूजा करती थीं। 18. | mahabharat अध्याय 1.170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथार्चयन्ति चादित्यमुद्यन्तं ब्रह्मवादिन:।
तथा संवरणं पार्थ ब्राह्मणावरजा: प्रजा:॥ १८॥
अनुवाद
पार्थ! जिस प्रकार ब्रह्मवादी महर्षि उगते हुए सूर्य की पूजा करते हैं, उसी प्रकार क्षत्रिय, वैश्य तथा अन्य जातियाँ महाराजा संवरण की पूजा करती थीं। 18.
Partha! Just as the Brahmavadi Maharishis worship the rising Sun, in the same manner the Kshatriyas, Vaishyas and other castes used to worship Maharaja Samvaran. 18.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥