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mahabharat 1.170.15: इस पृथ्वी पर सुंदरता की दृष्टि से उनके समान कोई पुरुष नहीं था। वे कृतज्ञ और धर्म के ज्ञाता थे। इसलिए सूर्यदेव ने राजा संवरण को तपती के लिए उपयुक्त वर माना।   |   mahabharat अध्याय 1.170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.170.15 
तत: कृतज्ञं धर्मज्ञं रूपेणासदृशं भुवि।
तपत्या: सदृशं मेने सूर्य: संवरणं पतिम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इस पृथ्वी पर सुंदरता की दृष्टि से उनके समान कोई पुरुष नहीं था। वे कृतज्ञ और धर्म के ज्ञाता थे। इसलिए सूर्यदेव ने राजा संवरण को तपती के लिए उपयुक्त वर माना।
 
There was no man like him on this earth in terms of beauty. He was grateful and knowledgeable about Dharma. Therefore, the Sun God considered King Samvaran to be the suitable husband for Tapati.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)