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mahabharat 1.170.12: कुन्तीनन्दन! उन दिनों महाराज ऋक्ष के पुत्र राजा संवरण कुरुकुल के श्रेष्ठ एवं बलवान पुरुष थे। वे भगवान सूर्य की आराधना करने लगे। 12॥   |   mahabharat अध्याय 1.170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.170.12 
अथर्क्षपुत्र: कौन्तेय कुरूणामृषभो बली।
सूर्यमाराधयामास नृप: संवरणस्तदा॥ १२॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीनन्दन! उन दिनों महाराज ऋक्ष के पुत्र राजा संवरण कुरुकुल के श्रेष्ठ एवं बलवान पुरुष थे। वे भगवान सूर्य की आराधना करने लगे। 12॥
 
Kuntinandan! In those days, King Samvaran, son of Maharaj Riksha, was the best and strongest man of Kurukula. He started worshiping Lord Surya. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)