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mahabharat 1.170.11: वह युवावस्था को प्राप्त हो गई थी। अब उसका विवाह किसी के साथ करना आवश्यक था। उसे उस अवस्था में देखकर भगवान सूर्य को चिंता हुई कि उसका विवाह किसके साथ किया जाए। यह सोचकर उन्हें शांति नहीं मिल रही थी॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 1.170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 170: सूर्यकन्या तपतीको देखकर राजा संवरणका मोहित होना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.170.11 
सम्प्राप्तयौवनां पश्यन् देयां दुहितरं तु ताम्।
नोपलेभे तत: शान्तिं सम्प्रदानं विचिन्तयन्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वह युवावस्था को प्राप्त हो गई थी। अब उसका विवाह किसी के साथ करना आवश्यक था। उसे उस अवस्था में देखकर भगवान सूर्य को चिंता हुई कि उसका विवाह किसके साथ किया जाए। यह सोचकर उन्हें शांति नहीं मिल रही थी॥ 11॥
 
She attained youth. Now it was necessary to marry her to someone. Seeing her in that age, Lord Surya was worried about whom she should be married to. He could not find peace thinking about this.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)