Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.17.7-8: वहाँ सर्वत्र भयंकर सर्प हैं। दिव्य औषधियाँ उस तेजस्वी पर्वत को और भी अधिक प्रकाशमान कर रही हैं। वह महान गिरिराज अपनी ऊँचाई से स्वर्ग को घेरे हुए खड़ा है। सामान्य मनुष्यों के लिए वहाँ पहुँचना भी असम्भव है। वह पर्वतीय क्षेत्र अनेक नदियों और असंख्य वृक्षों से सुशोभित है। नाना प्रकार के सुन्दर पक्षियों के झुंड अपनी चहचहाहट से उस पर्वत को गुंजायमान करते रहते हैं। 7-8। | mahabharat अध्याय 1.17: मेरुपर्वतपर अमृतके लिये विचार करनेवाले देवताओंको भगवान् नारायणका समुद्रमन्थनके लिये आदेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ सर्वत्र भयंकर सर्प हैं। दिव्य औषधियाँ उस तेजस्वी पर्वत को और भी अधिक प्रकाशमान कर रही हैं। वह महान गिरिराज अपनी ऊँचाई से स्वर्ग को घेरे हुए खड़ा है। सामान्य मनुष्यों के लिए वहाँ पहुँचना भी असम्भव है। वह पर्वतीय क्षेत्र अनेक नदियों और असंख्य वृक्षों से सुशोभित है। नाना प्रकार के सुन्दर पक्षियों के झुंड अपनी चहचहाहट से उस पर्वत को गुंजायमान करते रहते हैं। 7-8।
There are dreadful snakes everywhere. Divine medicines make that illustrious mountain even more radiant. That great Giriraj (mountain mountain) stands encircling the heaven with its height. It is impossible for ordinary humans to reach there even by thinking. That mountainous region is decorated with many rivers and innumerable trees. Flocks of very beautiful birds of different types keep making that mountain noisy with their chirping. 7-8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥