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mahabharat 1.17.4: शौनकजी ने पूछा - सूतनन्दन! अब यह बताओ कि देवताओं ने किस प्रकार और किस स्थान पर मृत्युरूपी अमृत का मंथन किया था, जिससे महान बल और पराक्रम से युक्त वे महारथी अश्वराज उच्चैःश्रवा प्रकट हुए?॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.17: मेरुपर्वतपर अमृतके लिये विचार करनेवाले देवताओंको भगवान् नारायणका समुद्रमन्थनके लिये आदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 17: मेरुपर्वतपर अमृतके लिये विचार करनेवाले देवताओंको भगवान् नारायणका समुद्रमन्थनके लिये आदेश  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.17.4 
शौनक उवाच
कथं तदमृतं देवैर्मथितं क्व च शंस मे।
यत्र जज्ञे महावीर्य: सोऽश्वराजो महाद्युति:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
शौनकजी ने पूछा - सूतनन्दन! अब यह बताओ कि देवताओं ने किस प्रकार और किस स्थान पर मृत्युरूपी अमृत का मंथन किया था, जिससे महान बल और पराक्रम से युक्त वे महारथी अश्वराज उच्चैःश्रवा प्रकट हुए?॥4॥
 
Shaunakji asked - Sutanandan! Now tell me how and at which place the gods churned the nectar of death from which that great horse-king Uchchaihshrava, endowed with great strength and valour, appeared?॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)