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mahabharat 1.169.d1-61: हे ज्ञानियों में श्रेष्ठ अर्जुन! इसीलिए मैंने आपके प्रबल और दुष्ट प्रभाव को जानते हुए भी आप पर आक्रमण करने का विचार किया था। भरतश्रेष्ठ! आप लोग बड़े तेजस्वी हैं। आपने अपने गुणों से जो यश और कीर्ति फैलाई है, उसे तीनों लोकों में कौन नहीं जानता? बुद्धिमान यक्ष, राक्षस, गन्धर्व, पिशाच, नाग और राक्षस कुरुकुल की कथा विस्तारपूर्वक कहते हैं। 61॥   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक d1-61
 
 
श्लोक  1.169.d1-61 
(जानता च मया तस्मात् तेजश्चाभिजनं च व:।
इयं मतिमतां श्रेष्ठ धर्षितुं वै कृता मति:॥
को हि वस्त्रिषु लोकेषु न वेद भरतर्षभ।
स्वैर्गुणैर्विस्तृतं श्रीमद् यशोऽग्रॺं भूरिवर्चसाम्॥ )
यक्षराक्षसगन्धर्वा: पिशाचोरगदानवा:।
विस्तरं कुरुवंशस्य धीमन्त: कथयन्ति ते॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
हे ज्ञानियों में श्रेष्ठ अर्जुन! इसीलिए मैंने आपके प्रबल और दुष्ट प्रभाव को जानते हुए भी आप पर आक्रमण करने का विचार किया था। भरतश्रेष्ठ! आप लोग बड़े तेजस्वी हैं। आपने अपने गुणों से जो यश और कीर्ति फैलाई है, उसे तीनों लोकों में कौन नहीं जानता? बुद्धिमान यक्ष, राक्षस, गन्धर्व, पिशाच, नाग और राक्षस कुरुकुल की कथा विस्तारपूर्वक कहते हैं। 61॥
 
Arjun, the best among wise men! That's why I thought of attacking you, despite knowing your strong and evil influence. Bharatshrestha! You guys are very bright. Who does not know in the three worlds the glorious and excellent fame that you have spread with your qualities? The wise Yakshas, Rakshasas, Gandharvas, Vampires, Nagas and demons narrate in detail the story of Kurukula. 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)