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mahabharat 1.169.80: इसलिए हे कौरवों के वंश को बढ़ाने वाले अर्जुन! तुम यह जान लो कि जिस राज्य में विद्वान ब्राह्मणों की प्रधानता हो, वही राज्य दीर्घकाल तक सुरक्षित रह सकता है ॥ 80॥   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  1.169.80 
तस्मादेवं विजानीहि कुरूणां वंशवर्धन।
ब्राह्मणप्रमुखं राज्यं शक्यं पालयितुं चिरम्॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
इसलिए हे कौरवों के वंश को बढ़ाने वाले अर्जुन! तुम यह जान लो कि जिस राज्य में विद्वान ब्राह्मणों की प्रधानता हो, वही राज्य दीर्घकाल तक सुरक्षित रह सकता है ॥ 80॥
 
Therefore, O Arjuna, who increases the lineage of the Kauravas, you should know that only that kingdom can be protected for a long time where there is a predominance of learned Brahmins. ॥ 80॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि चैत्ररथपर्वणि गन्धर्वपराभवे एकोनसप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १६९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत चैत्ररथपर्वमें गन्धर्वपराभवविषयक एक सौ उनहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६९॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल ८२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)