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mahabharat 1.169.8-9: रात्रि के प्रारम्भ होने से पूर्व पश्चिम दिशा संध्या की प्रचण्ड लालिमा से आच्छादित हो जाती है। अस्सी मिनट को छोड़कर शेष समय यक्षों, गन्धर्वों और राक्षसों के लिए आरक्षित है, जो अपनी इच्छानुसार विचरण करते हैं। शेष दिन मनुष्यों के लिए अपने-अपने कर्मानुसार विचरण करने के लिए माना गया है।॥8-9॥   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  1.169.8-9 
संध्या संरज्यते घोरा पूर्वरात्रागमेषु या।
अशीतिभिर्लवैर्हीनं तन्मुहूर्तं प्रचक्षते॥ ८॥
विहितं कामचाराणां यक्षगन्धर्वरक्षसाम्।
शेषमन्यन्मनुष्याणां कर्मचारेषु वै स्मृतम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
रात्रि के प्रारम्भ होने से पूर्व पश्चिम दिशा संध्या की प्रचण्ड लालिमा से आच्छादित हो जाती है। अस्सी मिनट को छोड़कर शेष समय यक्षों, गन्धर्वों और राक्षसों के लिए आरक्षित है, जो अपनी इच्छानुसार विचरण करते हैं। शेष दिन मनुष्यों के लिए अपने-अपने कर्मानुसार विचरण करने के लिए माना गया है।॥8-9॥
 
‘Before the night begins, the western direction is covered with the fierce redness of the evening. Except for eighty minutes, the entire time is reserved for the Yakshas, Gandharvas and demons who move about as per their will. The rest of the day is considered to be for the humans to move about as per their work.॥ 8-9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)