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mahabharat 1.169.77: राजा को किसी अप्राप्य वस्तु या धन की प्राप्ति के लिए अथवा उपलब्ध धन आदि की रक्षा के लिए किसी गुणवान ब्राह्मण को पुरोहित नियुक्त करना चाहिए ॥77॥   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  1.169.77 
लाभं लब्धुमलब्धं वा लब्धं वा परिरक्षितुम्।
पुरोहितं प्रकुर्वीत राजा गुणसमन्वितम्॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
राजा को किसी अप्राप्य वस्तु या धन की प्राप्ति के लिए अथवा उपलब्ध धन आदि की रक्षा के लिए किसी गुणवान ब्राह्मण को पुरोहित नियुक्त करना चाहिए ॥77॥
 
The king should appoint a virtuous Brahmin as a priest to obtain any unattainable thing or wealth or to protect the available wealth etc. 77॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)