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mahabharat 1.169.75: जो छहों इन्द्रियों सहित वेदों का अध्ययन करने में तत्पर हों, सत्यनिष्ठ हों, सत्यनिष्ठ हों, धार्मिक हों और मन को वश में रखने वाले हों, ऐसे ब्राह्मण राजाओं के पुरोहित होने चाहिए ॥7 5॥   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  1.169.75 
वेदे षडङ्गे निरता: शुचय: सत्यवादिन:।
धर्मात्मान: कृतात्मान: स्युर्नृपाणां पुरोहिता:॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
जो छहों इन्द्रियों सहित वेदों का अध्ययन करने में तत्पर हों, सत्यनिष्ठ हों, सत्यनिष्ठ हों, धार्मिक हों और मन को वश में रखने वाले हों, ऐसे ब्राह्मण राजाओं के पुरोहित होने चाहिए ॥7 5॥
 
Those who are ready to study the Vedas along with the six organs, honest, truthful, religious and have control over the mind, such Brahmins should be the priests of the kings. 7 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)