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mahabharat 1.169.74: अतः हे तपतीपुत्र! इस लोक में मनुष्य जो भी कल्याणकारी कार्य करना चाहे, उसके लिए उसे ऐसे पुरोहितों को नियुक्त करना चाहिए जो अपने मन और इन्द्रियों को वश में कर सकें।   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  1.169.74 
तस्मात् तापत्य यत्किंचिन्नॄणां श्रेय इहेप्सितम्।
तस्मिन् कर्मणि योक्तव्या दान्तात्मान: पुरोहिता:॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
अतः हे तपतीपुत्र! इस लोक में मनुष्य जो भी कल्याणकारी कार्य करना चाहे, उसके लिए उसे ऐसे पुरोहितों को नियुक्त करना चाहिए जो अपने मन और इन्द्रियों को वश में कर सकें।
 
Therefore, O son of Tapati! Whatever welfare work a man wishes to do in this world, he should appoint priests who have control over their mind and senses. 74.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)