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mahabharat 1.169.72: हे शत्रुओं को कष्ट देने वाले वीर! यदि कोई दूसरा कामी क्षत्रिय रात्रि में मुझसे युद्ध करने आता, तो वह किसी भी प्रकार जीवित न बच पाता। 72.   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.169.72 
यस्तु स्यात् क्षत्रिय: कश्चित् कामवृत्त: परंतप।
नक्तं च युधि युध्येत न स जीवेत् कथंचन॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं को कष्ट देने वाले वीर! यदि कोई दूसरा कामी क्षत्रिय रात्रि में मुझसे युद्ध करने आता, तो वह किसी भी प्रकार जीवित न बच पाता। 72.
 
O brave one who torments his enemies! If any other lustful Kshatriya had come to fight with me at night, he would not have survived in any way. 72.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)