Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.169.70: हे तपती वंश को बढ़ाने वाले अर्जुन! मैं तुम्हें वह कारण भी बताता हूँ, जिसके कारण तुमने मुझे युद्ध में परास्त किया; कृपया सुनो।   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  1.169.70 
सोऽहं त्वयेह विजित: संख्ये तापत्यवर्धन।
येन तेनेह विधिना कीर्त्यमानं निबोध मे॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
हे तपती वंश को बढ़ाने वाले अर्जुन! मैं तुम्हें वह कारण भी बताता हूँ, जिसके कारण तुमने मुझे युद्ध में परास्त किया; कृपया सुनो।
 
O Arjuna, who increased the lineage of Tapati, I shall also tell you the reason why you defeated me in the war; please listen. 70.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)