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mahabharat 1.169.7: वहाँ मातासहित पाण्डवों को अपना भयंकर धनुष उठाते देखकर परन्तप इस प्रकार बोले-॥7॥   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.169.7 
स दृष्ट्वा पाण्डवांस्तत्र सह मात्रा परंतपान्।
विस्फारयन् धनुर्घोरमिदं वचनमब्रवीत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वहाँ मातासहित पाण्डवों को अपना भयंकर धनुष उठाते देखकर परन्तप इस प्रकार बोले-॥7॥
 
Parantapa, seeing the Pandavas with their mother there, twirling his dreadful bow, spoke thus -॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)