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mahabharat 1.169.69: कुन्ती नन्दन! इसके अतिरिक्त एक बात और भी है कि रात्रि में हमारी शक्ति बहुत बढ़ जाती है। इसीलिए उस स्त्री के साथ रहने के कारण मैं क्रोध से भर गया था।   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.169.69 
नक्तं च बलमस्माकं भूय एवाभिवर्धते।
यतस्ततो मां कौन्तेय सदारं मन्युराविशत्॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
कुन्ती नन्दन! इसके अतिरिक्त एक बात और भी है कि रात्रि में हमारी शक्ति बहुत बढ़ जाती है। इसीलिए उस स्त्री के साथ रहने के कारण मैं क्रोध से भर गया था।
 
Kunti Nandan! Besides this, there is one more thing that our strength increases a lot during the night. That is why I was filled with anger due to staying with the woman. 69.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)