Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.169.68: हे कुरुपुत्र! इसका कारण यह है कि जो भी पुरुष अपने शारीरिक बल पर निर्भर रहता है, वह स्त्री के सामने अपमानित होना सहन नहीं कर पाता ॥68॥   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  1.169.68 
स्त्रीसकाशे च कौरव्य न पुमान् क्षन्तुमर्हति।
धर्षणामात्मन: पश्यन् बाहुद्रविणमाश्रित:॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुपुत्र! इसका कारण यह है कि जो भी पुरुष अपने शारीरिक बल पर निर्भर रहता है, वह स्त्री के सामने अपमानित होना सहन नहीं कर पाता ॥68॥
 
O son of Kuru! The reason for this is that any man who relies on his physical strength is unable to tolerate being insulted in front of a woman. ॥ 68॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)