Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.169.67: तुम्हारा अन्तःकरण शुद्ध है, तुम्हारा मन और बुद्धि भी उत्तम है। हे पार्थ! तुम्हारे विषय में यह सब जानते हुए भी मैंने यहाँ आक्रमण किया। 67।   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  1.169.67 
उत्तमां च मनोबुद्धिं भवतां भावितात्मनाम्।
जानन्नपि च व: पार्थ कृतवानिह धर्षणाम्॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारा अन्तःकरण शुद्ध है, तुम्हारा मन और बुद्धि भी उत्तम है। हे पार्थ! तुम्हारे विषय में यह सब जानते हुए भी मैंने यहाँ आक्रमण किया। 67।
 
Your conscience is pure, your mind and intellect are also good. O Partha! Even after knowing all this about you, I attacked here. 67.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)