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mahabharat 1.169.65: कुरुश्रेष्ठ! धर्म, वायु, इन्द्र, दोनों अश्विनीकुमार तथा महाराज पाण्डु- ये छह महापुरुष कुरुवंश की वृद्धि करने वाले हैं। पार्थ! ये छह पुरुष, देवताओं और मनुष्यों के अधिपति, तुम्हारे पिता हैं। मैं यह सब जानता हूँ॥65॥   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.169.65 
धर्मं वायुं च शक्रं च विजानाम्यश्विनौ तथा।
पाण्डुं च कुरुशार्दूल षडेतान् कुरुवर्धनान्।
पितॄनेतानहं पार्थ देवमानुषसत्तमान्॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
कुरुश्रेष्ठ! धर्म, वायु, इन्द्र, दोनों अश्विनीकुमार तथा महाराज पाण्डु- ये छह महापुरुष कुरुवंश की वृद्धि करने वाले हैं। पार्थ! ये छह पुरुष, देवताओं और मनुष्यों के अधिपति, तुम्हारे पिता हैं। मैं यह सब जानता हूँ॥65॥
 
Kurushrestha! Dharma, Vayu, Indra, both Ashwini Kumar and Maharaj Pandu – these six great men are going to increase the Kuru dynasty. Parth! These six persons, the heads of gods and humans, are your fathers. I know all this. 65॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)