श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  1.169.62 
नारदप्रभृतीनां तु देवर्षीणां मया श्रुतम्।
गुणान् कथयतां वीर पूर्वेषां तव धीमताम्॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! मैंने भी नारद आदि मुनियों के मुख से तुम्हारे बुद्धिमान पूर्वजों की प्रशंसा सुनी है।
 
Brave! I have also heard the praises of your wise ancestors from the mouths of sages like Narada. 62.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)