गन्धर्व उवाच
अनग्नयोऽनाहुतयो न च विप्रपुरस्कृता:।
यूयं ततो धर्षिता: स्थ मया वै पाण्डुनन्दना:॥ ६०॥
अनुवाद
गंधर्व ने कहा- हे पाण्डुपुत्रों! तुम लोग (क्योंकि तुम्हारा विवाह नहीं हुआ है) तीनों प्रकार के अग्नियों की सेवा नहीं करते। (तुमने विद्याध्ययन पूर्ण कर लिया है और समावर्तन संस्कार हो चुका है, अतः) प्रतिदिन अग्नि में आहुति भी नहीं देते। तुम्हारे सामने कोई ब्राह्मण पुरोहित भी नहीं है। इन्हीं कारणों से मैंने तुम पर आक्रमण किया है।
Gandharva said- O sons of Pandu! You people (because you are not married) do not serve the three types of fires. (You have completed your studies and have undergone the Samavartana Sanskar, hence) you do not even offer sacrifices to the fire every day. There is no Brahmin priest in front of you. Due to these reasons I have attacked you. 60.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥