श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  1.169.59 
कारणं ब्रूहि गन्धर्व किं तद् येन स्म धर्षिता:।
यान्तो वेदविद: सर्वे सन्तो रात्रावरिंदमा:॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
गन्धर्व! हम सभी वेदों के ज्ञाता हैं और अपने शत्रुओं का दमन करने की शक्ति रखते हैं; फिर भी आपने रात्रि में यात्रा करते समय हम पर आक्रमण क्यों किया? कृपया इस पर भी कुछ प्रकाश डालिए॥59॥
 
Gandharva! We all are experts in Vedas and have the power to suppress our enemies; yet why have you attacked us while we were travelling at night? Please shed some light on this too. ॥ 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)