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mahabharat 1.169.58: अर्जुन बोले- ठीक है, मैं तुम्हें यह अस्त्र-शस्त्र विद्या दे दूँगा और तुम्हारे घोड़े ले लूँगा। हमारी मित्रता सदैव बनी रहे। हे मित्र गन्धर्वराज! यह बताओ कि हम मनुष्य तुमसे क्यों डरते हैं?॥ 58॥   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  1.169.58 
अर्जुन उवाच
त्वत्तोऽस्त्रेण वृणोम्यश्वान् संयोग: शाश्वतोऽस्तु नौ।
सखे तद् ब्रूहि गन्धर्व युष्मभ्यो यद् भयं भवेत्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले- ठीक है, मैं तुम्हें यह अस्त्र-शस्त्र विद्या दे दूँगा और तुम्हारे घोड़े ले लूँगा। हमारी मित्रता सदैव बनी रहे। हे मित्र गन्धर्वराज! यह बताओ कि हम मनुष्य तुमसे क्यों डरते हैं?॥ 58॥
 
Arjun said – Okay, I will give you this knowledge of weapons and take the horses from you. May our friendship remain forever. Friend Gandharvaraj! Tell me, why do we humans get scared of you people?॥ 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)