Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.169.57: मैं तुमसे उत्तम आग्नेय अस्त्र भी ग्रहण करूँगा। हे भरतवंशी रत्न अर्जुन! ऐसा करने से ही हम दोनों में दीर्घकाल तक उचित सामंजस्य बना रहेगा॥ 57॥   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  1.169.57 
त्वत्तोऽप्यहं ग्रहीष्यामि अस्त्रमाग्नेयमुत्तमम्।
तथैव योग्यं बीभत्सो चिराय भरतर्षभ॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
मैं तुमसे उत्तम आग्नेय अस्त्र भी ग्रहण करूँगा। हे भरतवंशी रत्न अर्जुन! ऐसा करने से ही हम दोनों में दीर्घकाल तक उचित सामंजस्य बना रहेगा॥ 57॥
 
I will also accept the excellent Agneya weapon from you. O Arjuna, the jewel of the Bharata clan! Only by doing this will proper harmony remain between us for a long time.॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)