Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.169.55: अर्जुन ने कहा - गंधर्व! यदि आपने मुझे प्रसन्नता से या मेरे प्राणों पर आए संकट से बचाने के लिए ज्ञान, धन या शास्त्र दिया है, तो मैं ऐसे उपहार स्वीकार करना पसन्द नहीं करता। | mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अर्जुन उवाच
यदि प्रीतेन मे दत्तं संशये जीवितस्य वा।
विद्याधनं श्रुतं वापि न तद् गन्धर्व रोचये॥ ५५॥
अनुवाद
अर्जुन ने कहा - गंधर्व! यदि आपने मुझे प्रसन्नता से या मेरे प्राणों पर आए संकट से बचाने के लिए ज्ञान, धन या शास्त्र दिया है, तो मैं ऐसे उपहार स्वीकार करना पसन्द नहीं करता।
Arjun said - Gandharva! If you have given me knowledge, wealth or scriptures out of pleasure or to save me from a danger to my life, then I do not like to accept such gifts.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥