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mahabharat 1.169.52: (अग्नि में आहुति देने के कारण) ब्राह्मण का दाहिना हाथ वज्र है। क्षत्रिय का रथ वज्र है। वैश्य लोग जो दान देते हैं, वह भी वज्र माना जाता है और शूद्र लोग जो सेवा करते हैं, वह भी वज्र ही मानी जानी चाहिए। 52॥   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.169.52 
वज्रपाणिर्ब्राह्मण: स्यात् क्षत्रं वज्ररथं स्मृतम्।
वैश्या वै दानवज्राश्च कर्मवज्रा यवीयस:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
(अग्नि में आहुति देने के कारण) ब्राह्मण का दाहिना हाथ वज्र है। क्षत्रिय का रथ वज्र है। वैश्य लोग जो दान देते हैं, वह भी वज्र माना जाता है और शूद्र लोग जो सेवा करते हैं, वह भी वज्र ही मानी जानी चाहिए। 52॥
 
(Due to offering sacrifice in fire) The right hand of Brahmin is Vajra. Kshatriya's chariot is Vajra. The charity that Vaishya people give is also considered as Vajra and the service done by Shudra people should also be considered as Vajra. 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)